विकलांग श्रद्धा का दौर
परसाई जी का व्यंग संग्रह जो उन्होंन उन्होंने आपातकाल और उसके बाद के राजनैतिक और सामाजिक मूल्यों के पतन के ऊपर लिखा है।
परसाई जी का व्यंग संग्रह जो उन्होंन उन्होंने आपातकाल और उसके बाद के राजनैतिक और सामाजिक मूल्यों के पतन के ऊपर लिखा है।
हरिशंकर परसाई जी एक ऐसे व्यंगकार थे जिनकी कलम से लिखे व्यंग बहुत गहरी मार करते हैं । उन्होंने हमेशा सामाजिक व् राजनैतिक जीवन के दोगलेपन , चाटुकारिता और ढोंग के बारे में खुलकर लिखा। उनके रचित व्यंग मात्र हंसी ठिठोली से कहीं अधिक होते हैं जो आपको मुस्कुराने के अलावा गम्भीरता से सोचने पर मजबूर करते हैं।
A heartwarming story told by the master storyteller Perumal Murugan through the eyes of a got.